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जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि है मैं नाहीं । प्रेम गली अति सांकरी जामें दो न समाहीं ।। भावार्थ: कबीर दास जी कहते हैं, जब तक मन में अहंकार था तब तक ईश्वर का साक्षात्कार न हुआ, जब अहंकार (अहम) समाप्त हुआ तभी प्रभु मिले | जब ईश्वर का साक्षात्कार हुआ, तब अहंकार स्वत: ही नष्ट हो गया | ईश्वर की सत्ता का बोध तभी... पूरा पढ़े -> http://bit.ly/3vq8jZN #KabirKeDohe #Hindi #Poetry #KabirAmritwani #SantKabir #KabirDas #HindiDohe